आयुर्वेद मार्तंड वैद्य डॉ. सिद्धिनंदन मिश्र को भावभीनी श्रद्धांजलि, राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित विद्वान के योगदान को आयुर्वेद रक्षा एबं विकास संस्थान द्वारा किया गया याद

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गया जी आयुर्वेद जगत के प्रख्यात विद्वान, चिकित्सक एवं शिक्षाविद् स्वर्गीय प्रो. वैद्य डॉ. सिद्धिनंदन मिश्र जी के निधन पर डॉक्टर विवेकानंद पथ गोल बागीचा गया जी में आयुर्वेद रक्षा एवं विकास संस्थान, ब्राह्मण महासभा एवं कौटिल्य मंच के संयुक्त तत्वावधान में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा की अध्यक्षता डॉ. विवेकानंद मिश्रा ने किया। डॉक्टर मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा की शरीर की दृष्टि से धन की दृष्टि से बुद्धि की दृष्टि से शक्ति संपन्न तो अनेक मिल जाते हैं, परंतु प्रतिभा की संपदा मात्र उनके व्यक्तित्व को सौभाग्य मंडित करती है जिन्होंने स्वयं को तपने एवं निखारने में समय श्रम मनोयोग को लगाया है उनमें ही एक थे आयुर्वेद के मार्तंड कहे जाने वाले आयुर्वेद रक्षा एवं विकास संस्थान के संरक्षक पंडित सिद्धिनंदन मिश्र जी।

आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान, शैक्षणिक उपलब्धियों और समाज के प्रति उनकी सेवाओं को याद करते हुए डॉक्टर मिश्रा ने आगे कहा की विभिन्न प्रकार के संघर्ष और चुनौतियों के बीच अपनी बहुआयामी भूमिका का निष्ठा पूर्वक निर्वहन करते हुए आयुर्वेद जगत के एक निष्ठ साधक मिश्रा जी ने अपनी सेवा यात्रा को सदा सर्वदा के लिए 98 वर्ष के पड़ाव पर पहुंचकर हम सबों से अलग हो गए। उनकी विनम्रता समाज राष्ट्र के प्रति समर्पण आयुर्वेद प्रेम इन्हें अमर बना दिया है। हम सबों के लिए वे स्मरणीय अनुकरणीय थे। डॉक्टर मिश्रा ने कहा की गया जिले के एक प्रतिष्ठित संभ्रांत विद्वान सूर्यांश परिवार में जन्म लिए कंदौल गांव निवासी थे।डॉ. सिद्धिनंदन मिश्र जी का निधन संपूर्ण आयुर्वेद जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।डॉ. मिश्र जी ने अपना संपूर्ण जीवन आयुर्वेद के अध्ययन, अध्यापन, अनुसंधान और औषधि-विज्ञान के विकास के लिए समर्पित कर दिया। वे संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के रसशास्त्र विभाग में विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत रहे। सेवानिवृत्ति के पश्चात उन्होंने गुजरात के जामनगर स्थित आयुर्वेद संस्थानों में भी महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। मुख्य चिकित्सा सलाहकार एवं उपनिदेशक जैसे पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने आयुर्वेद के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।विशेष रूप से रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। आयुर्वेदीय रसशास्त्र, प्रारम्भिक रसशास्त्र तथा अभिनव भैषज्य कल्पना विज्ञान जैसी उनकी पुस्तकें आयुर्वेद के विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुवाद, संपादन और अनुसंधान में भी उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके लेखन और शैक्षणिक कार्यों ने आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान को व्यवस्थित रूप से विद्यार्थियों और शोधार्थियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ख्यातिप्राप्त आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संपूर्णानंद मिश्रा रांची ने कहा कि आयुर्वेद के प्रति उनकी निष्ठा, विद्वत्ता और दीर्घकालीन सेवाओं को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उनके वर्षों के शैक्षणिक, शोधपरक और आयुर्वेद संबंधी योगदान की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में स्मरण करते हुए प्रदान किया गया था। यह संपूर्ण आयुर्वेदज्ञो को गौरवान्वित करता है।

दिव्य रश्मि के प्रधान संपादक डॉ राकेश दत्त मिश्र ने कहा गया कि ऐसे विद्वानों की उपलब्धियां न केवल उनके परिवार और क्षेत्र के लिए गौरव का विषय होती हैं, बल्कि देश की समृद्ध ज्ञान परंपरा को भी प्रतिष्ठा प्रदान करती हैं।

सभा में उपस्थित वरिष्ठ व्यक्तित्व आचार्य   सचिदानंद मिश्र (नैकी) जी के विचारों के संदर्भ में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और गुरुजनों के सम्मान की परंपरा को भी रेखांकित किया गया। यह संदेश सामने आया कि किसी विद्वान की सबसे बड़ी विरासत उसका ज्ञान, उसके संस्कार और समाज के लिए किए गए कार्य होते हैं। वर्तमान पीढ़ी को अपने पूर्ववर्ती विद्वानों के जीवन से प्रेरणा लेकर शिक्षा, अनुशासन, विनम्रता और सेवा की भावना को अपनाना चाहिए। भारतीय परंपरा में ज्ञान का सम्मान करना और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना सदैव महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे विद्वानों का जीवन समाज को अपनी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा देता है। स्वर्गीय डॉ. सिद्धिनंदन मिश्र जी के परिवार के अत्यंत करीब रहे आचार्य मिश्र ने बताया की डॉक्टर साहब का अंतिम संस्कार वाराणसी में किया गया। उनके निधन से परिवार, विद्यार्थियों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों में शोक व्याप्त है। इस दुःखद घड़ी में उनकी पुत्रियों मीरा एवं उषा के प्रति विशेष संवेदना व्यक्त की गई। सभा में उपस्थित लोगों ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वह दोनों पुत्रियों को अपने पिता के निधन से उत्पन्न गहरे दुःख को सहन करने की शक्ति, धैर्य और संबल प्रदान करें। पिता का स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद जीवन की अमूल्य धरोहर होता है। ईश्वर उनके परिवार के सभी सदस्यों को इस कठिन समय में साहस प्रदान करें तथा दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। संस्थान महासभा एवं मंच से जुड़े उपस्थित लोगों ने कहा कि किसी विद्वान की पहचान केवल उसके पद और सम्मान से नहीं, बल्कि उसके ज्ञान, कार्यों और समाज पर पड़े सकारात्मक प्रभाव से होती है। डॉ. मिश्र जी द्वारा रचित ग्रंथ, उनके शोध और शैक्षणिक सेवाएं आयुर्वेद के क्षेत्र में लंबे समय तक उपयोगी बनी रहेगी।

श्रद्धांजलि सभा में जिन प्रमुख लोगों ने भाग लिया उनमें विधायक ज्योति मांझी डॉ. ए डी उपाध्याय डॉ.ओपी मिश्रा हरि नारायण त्रिपाठी गौरी शंकर सिंह राजीव नयन पांडे अंबिका सिंह शीला जायसवाल रिया कुमारी वैद्य के.के पाठक डॉ ज्ञानेश भारद्वाज डॉक्टर रविंद्र कुमार डॉक्टर दिनेश कुमार सिंह मनीष कुमार दिलीप कुमार शंभू गिरी विनोद तिवारी डॉ रश्मि डॉ. अकेला डॉ. परमेश्वर प्रसाद मिश्रा प्रवीण ओझा मृदुला मिश्रा डिंपल कुमारी डॉ मनोज विनोद मिश्रा अजीत कुमार मिश्रा प्रमोद मिश्रा किरण पाठक पार्वती देवी प्रोफेसर सुनील मिश्रा डॉक्टर रश्मि मिश्रा छोटे बाबू पुष्पा डॉ. रमेश कुमार उपाध्याय डॉ राजीव नयन मिश्रा डॉ. सुरेंद्र विश्वकर्मा संतोष पाठक नीरू कुमारी अरुण ओझा महेश मिश्रा रवि विश्वजीत चक्रवर्ती गिरीश मिश्रा अच्युत मराठे रिया कुमारी विजय कुमार मिश्रा रणजीत मिश्रा पवन मिश्रा दीपक पाठक उत्तम पाठक रश्मि मिश्रा योगेश मिश्रा अधिवक्ता पूनम कुमारी फूल कुमारी नीलम कुमारी प्रोफेसर रीना सिंह वीणा रूबी कुमारी कुमारी सोनी मिश्रा पार्वती देवी अप्रिता मिश्रा सज्जन कुमार राम केवल सिंह पुष्पांजलि मनोज कुमार सिंह पूजा कुमारी नुसरत प्रवीण सीमा पोद्दार प्यारी देवी गौरव सिंह इंद्रदेव मांझी चंद्रभूषण मिश्रा सुनीता कुमार देवी पुष्पा कुमारी मुन्नी देवी रजनी चावला रिंकू कुमारी के अलावा कई लोग मौजूद थे।

रिपोर्ट:- प्रियांशु मिश्रा

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