
चुनाव समाप्त होने के बाद दो संप्रदायों में लड़ाई लगाने में मशगूल हो जाती है राजनीतिक दल
क्या चुनावी वादे कानूनी रूप से अपरिहार्य नहीं होने चाहिए?क्या लोकतंत्र में चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम है? नहीं,बल्कि जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच एक मजबूत विश्वास भी है, चुनाव के समय राजनीतिक दल और उम्मीदवार रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की आय, भ्रष्टाचार पर रोक, महंगाई नियंत्रण और विकास













