पं अटल बिहारी वाजपेयी, जिनके लिए राजनीति नहीं राष्ट्र नीति सर्वोपरी थी:डॉ० विवेकानंद मिश्र

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भारतभूमि के महान राष्ट्रनायक, प्रखर राजनेता, ओजस्वी वक्ता, संवेदनशील कवि एवं जनमानस के प्रिय नेता भारतरत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर गया जी में श्रद्धा एवं स्मरण से परिपूर्ण एक गरिमामयी सभा का आयोजन किया गया। यह सभा गया जी ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष आदरणीय डॉ. विवेकानंद मिश्रा जी के निवास पर आयोजित हुई, जिसमें समाज के अनेक गणमान्य व्यक्तियों, विद्वानों एवं श्रद्धालुजनों ने उपस्थित होकर राष्ट्रपुरुष अटल जी के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

सभा का वातावरण आरंभ से ही अत्यंत गंभीर, आत्मीय एवं राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत रहा। उपस्थित जनों ने अटल बिहारी वाजपेयी जी के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके महान व्यक्तित्व, कृतित्व और राष्ट्र के प्रति उनके अतुलनीय योगदान का स्मरण किया। सभा की अध्यक्षता भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा एवं कौटिल्य राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर विवेकानंद मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कीअटल जी का जीवन भारतीय लोकतंत्र में शुचिता, मर्यादा, सहिष्णुता, राष्ट्रनिष्ठा और वैचारिक दृढ़ता का अनुपम उदाहरण रहा है। उन्होंने राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम न मानकर राष्ट्रसेवा का साधन बनाया। अटल जी के व्यक्तित्व को भारतीय राजनीति की उस उज्ज्वल परंपरा का प्रतीक बताया, जिसमें मतभेद के बीच भी मनभेद के लिए कोई स्थान नहीं होता। उन्होंने कहा कि अटल जी की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह थी कि वे अपने विरोधियों का भी सम्मान करना जानते थे। उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि था और राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर भारत की एकता, अखंडता तथा गौरव का स्थान था। उनके जीवन से आज की पीढ़ी को सार्वजनिक जीवन में मर्यादा एवं संयम का पाठ सीखना चाहिए।

सभा में उपस्थित आचार्य पंडित लाल भूषण मिश्र ने अटल जी के साहित्यिक एवं मानवीय पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे शब्दों के साधक और भावनाओं के कवि भी थे। उनके व्यक्तित्व में कठोर राष्ट्रनिष्ठा और कोमल मानवीय संवेदना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता था। उनके काव्य में संघर्ष के मध्य आशा, निराशा के मध्य साहस और विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ते रहने का संदेश मिलता है।

इस अवसर पर आचार्य सचिदानंद मिश्र, नाइकी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए अटल जी के जीवन को भारतीय संस्कृति और राष्ट्रधर्म के प्रति समर्पित जीवन बताया। उन्होंने कहा कि अटल जी की वाणी में ओज था, विचारों में गहराई थी और व्यवहार में सहजता थी। वे भारतीय परंपरा के प्रति गर्व रखते हुए आधुनिक भारत के निर्माण की आवश्यकता को भी भली-भांति समझते थे। उनका जीवन यह संदेश देता है कि राष्ट्र की सेवा केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं होती; विचार, वाणी, कर्म और आचरण—सभी के माध्यम से राष्ट्र के प्रति अपना दायित्व निभाया जा सकता है।

पंडित बल मुकुंद मिशरा मिश्र जी ने अटल जी के साहित्यिक व्यक्तित्व और उनकी राष्ट्रचेतना को स्मरण करते हुए कहा कि अटल जी की कविताओं और उनके सार्वजनिक जीवन में एक समान भाव दिखाई देता है—संघर्ष से पलायन नहीं, बल्कि संघर्ष का सामना करते हुए राष्ट्रहित में आगे बढ़ना। उनकी भाषा में भारतीय मिट्टी की सुगंध थी और उनके विचारों में देश की आत्मा का स्पंदन। उन्होंने अटल जी को ऐसे व्यक्तित्व के रूप में स्मरण किया जिनका प्रभाव केवल उनके समय तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

सभा के दौरान अन्य उपस्थित गणमान्यजनों ने भी अटल बिहारी वाजपेयी जी के जीवन के विभिन्न पक्षों पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने उनके राजनीतिक जीवन, संसदीय गरिमा, राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, विदेश नीति में उनकी दूरदर्शिता, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनके सम्मान तथा भारतीय समाज को एक सूत्र में बांधने वाली उनकी उदार दृष्टि का स्मरण किया।

ज्योति शिक्षा एवं शोध संस्थान के निदेशक डॉक्टर ज्ञानेश भारद्वाज ने कहा अटल जी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में रहते हुए भी व्यक्ति अपने सिद्धांतों, भाषा की मर्यादा और मानवीय संवेदनाओं को जीवित रख सकता है। वे सत्ता के शिखर पर पहुंचे, किंतु उनके व्यक्तित्व में अहंकार का प्रवेश नहीं हुआ। वे अपने भाषणों से जनसमुदाय को प्रभावित करते थे, किंतु उनकी सबसे बड़ी शक्ति उनकी वाणी मात्र नहीं, बल्कि उनके विचारों की प्रामाणिकता थी। उनके लिए लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने की व्यवस्था नहीं, बल्कि विभिन्न मतों और विचारों के सम्मान की जीवन-पद्धति थी।

समाज से भी डिंपल कुमारी ने कहा आज जब सार्वजनिक जीवन में संवाद की मर्यादा और वैचारिक सहिष्णुता को लेकर अनेक प्रश्न उठते हैं, तब अटल बिहारी वाजपेयी जी का व्यक्तित्व और भी अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है। उन्होंने यह दिखाया कि दृढ़ विचारधारा के साथ भी विनम्रता संभव है, राजनीतिक संघर्ष के साथ भी व्यक्तिगत सम्मान संभव है और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए लोकतांत्रिक संवाद को जीवित रखा जा सकता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता मो याहिया ने डॉ. विवेकानंद मिश्रा जी के निवास पर आयोजित यह श्रद्धांजलि सभा केवल किसी महान नेता की पुण्यतिथि का स्मरण मात्र नहीं रही, बल्कि यह राष्ट्रचिंतन, भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और आने वाली पीढ़ी के लिए आदर्शों के पुनर्स्मरण का अवसर भी बनी। सभा में उपस्थित सभी लोगों ने अटल जी के जीवन से प्रेरणा ग्रहण करते हुए राष्ट्र, समाज और संस्कृति के प्रति अपने दायित्वों को और अधिक गंभीरता से निभाने का संकल्प व्यक्त किया। राखी कुमारी ने कहा अटल बिहारी वाजपेयी जी आज हमारे बीच भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, किंतु उनके विचार, उनकी कविताएं, उनकी वाणी और उनका विराट व्यक्तित्व आज भी भारतीय जनमानस में जीवित है। वे उन विरल विभूतियों में से थे जिनकी स्मृति समय के साथ धूमिल नहीं होती, बल्कि प्रत्येक पीढ़ी के साथ और अधिक प्रासंगिक होती जाती है। गया की इस पावन धरती पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा ने एक बार फिर यह अनुभूति कराई कि राष्ट्रपुरुषों का जीवन केवल इतिहास के पन्नों में सुरक्षित रखने के लिए नहीं होता, बल्कि उनके आदर्शों को वर्तमान जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। अटल जी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सभा का मूल भाव यही रहा कि भारत की महान परंपरा, लोकतांत्रिक मर्यादा, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक चेतना को आगे बढ़ाना ही उस महान राष्ट्रनायक के प्रति हमारी वास्तविक कृतज्ञता होगी।

बजरंग दल के जिला अध्यक्ष विश्वजित चक्रवर्ती ने कहा राष्ट्र के प्रति समर्पित उनका जीवन, उनकी वाणी और उनके विचार सदैव भारतीय जनमानस को प्रेरणा देते रहेंगे।

श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी को कोटि-कोटि नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में मुख्य रूप से अच्युत अनंत मराठे, आचार्य अरुण मिश्र मधुप, आचार्य सुनील कुमार पाठक, हरि नारायण त्रिपाठी, डॉक्टर रविंद्र कुमार, राजीव नयन पांडे,अमरनाथ नाथ, रणजीत पाठक, पवन मिश्र, पुष्पलता चौबे, नीलम कुमारी, मो युसूफ, शिला देवी, मुन्नी देवी, रामा शंकर मिश्र, अशोक दूबे, निक्की देवी, सूबेदार सिंह, बृजेश राय, संजय कुमार वैद्य, अंकित राज, मनमोहन प्रसाद, रूबी देवी, राम केवल सिंह, नवीन कुमार, मनीष कुमार, गौरव कुमार, प्यारी देवी, प्रोफेसर अशोक कुमार, नसरत परवीन, तस्लिम, ब्रिजमोहन पंडित, पुष्प देवी ममता देवी, संतोष कुमार दीपक कुमार, राम नरेश पाठक, मुन्ना बाबू, तानिष्का मिश्रा,किरण पाठक, अनिता देवी, प्रेम कुमार अजय मिश्रा, सुनील कुमार, प्रियांशु मिश्र, रिनकू कुमारी, शिव शंकर प्रसाद शंभू गिरी, दिलीप कुमार, नीरज वर्मा, शिव जी, फूल कुमारी मृदुला मिश्रा पुष्पा गुप्ता, पुष्पा राज, संतोष देवी, पर्वती देवी, सुनीता देवी, रजनी चावला, चंद्र भूषण मिश्रा रंजना पांडे शंभू गुर्दा के अलावा कई लोग मौजूद थे।

रिपोर्ट:- प्रियांशु मिश्रा

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