ऊर्जा मंत्रालय ने राज्यों को दिया निर्देश- स्मार्ट मीटर को किया अनिवार्य, जल्द बढ़ाएं रफ्तार

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गया: केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने बिहार समेत देश भर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मंत्रालय ने यह भी कहा है कि स्मार्ट मीटर सभी बिजली उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को पारदर्शी और सटीक बिलिंग के साथ बिजली की खपत पर निगरानी रखने की सुविधा मिलेगी, जबकि बिजली वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता में भी सुधार होगा। आपको बता दें कि स्मार्ट मीटर के मामले में बिहार सबसे आगे है। यहां बिजली के कुल 2.11 करोड़ उपभोक्ता हैं, जिसमें 92 लाख बिजली उपभोक्ताओं ने अपने घरों में स्मार्ट मीटर लगवा लिया है। जिसका सीधा फायदा उन्हें मिल भी रहा है।

मंत्रालय की ओर से ऊर्जा/बिजली विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों और सचिवों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि देश में स्मार्ट मीटर लगाने का काम रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की योजनाओं के तहत चल रहा है। सरकार ने अब सभी उपभोक्ता श्रेणियों में इसकी स्थापना की गति बढ़ाने पर जोर दिया है।

पत्र में Central Electricity Authority (Installation and Operation of Meters) (Amendment) Regulations, 2026 का हवाला देते हुए कहा गया है कि जहां संचार नेटवर्क उपलब्ध है, वहां सभी उपभोक्ताओं को संबंधित भारतीय मानकों के अनुरूप स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली आपूर्ति की जानी है। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित समयसीमा का पालन करना होगा।

बिजली मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर की स्थापना अनिवार्य किए जाने का संबंध उपभोक्ता के बिजली भुगतान के प्रीपेड या पोस्टपेड तरीके से नहीं है। भुगतान का तरीका केवल एक कार्यात्मक कॉन्फिग्रेशन है। यानी स्मार्ट मीटर लगाने का प्रावधान दोनों प्रकार के उपभोक्ताओं पर लागू हो सकता है।

मंत्रालय के अनुसार स्मार्ट मीटर से बिजली बिलिंग में पारदर्शिता और सटीकता आएगी। उपभोक्ता अपनी बिजली खपत की निगरानी कर सकेंगे और इससे उन्हें अपनी खपत को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

स्मार्ट मीटर के जरिए Time of Day (ToD) Tariff जैसी व्यवस्था के लाभ उठाने का रास्ता भी आसान होगा। उपभोक्ता बिजली की खपत को अधिक दर वाले पीक समय से कम दर वाले समय की ओर स्थानांतरित कर सकते हैं। इससे बिजली के बिल में कमी लाने में मदद मिल सकती है।

मंत्रालय ने कहा कि स्मार्ट मीटर ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव के लिए जरूरी इको-सिस्टम तैयार करने में भी मदद करेंगे। दूसरी ओर, बिजली वितरण कंपनियों के लिए इससे ऊर्जा लेखांकन और परिचालन दक्षता में सुधार होगा।

बिजली मंत्रालय ने बताया कि उपभोक्ताओं के लिए छोटी राशि में रिचार्ज करने की सुविधा और वितरण कंपनियों के लिए अग्रिम राजस्व प्राप्ति जैसे फायदों को देखते हुए RDSS के तहत स्मार्ट मीटर की स्थापना को प्रीपेड मोड में समर्थन दिया जा रहा है। इससे वितरण कंपनियों की कार्यशील पूंजी की जरूरत कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे मौजूदा नियमों के अनुरूप सभी उपभोक्ता श्रेणियों में स्मार्ट मीटर लगाने के अभियान को जारी रखते हुए इसकी गति तेज करें, ताकि उपभोक्ताओं और बिजली वितरण कंपनियों दोनों को इसके लाभ मिल सकें।मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की बिजली वितरण कंपनियों के प्रमुखों को भी इस संबंध में अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही REC और PFC को संबंधित कार्रवाई के समन्वय और Action Taken Report प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

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Author: v9news

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