भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा की विचार-गोष्ठी में, सामाजिक जागरण एवं लोकतांत्रिक मूल्यों पर हुआ विमर्श

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गया जी(ब्यूरो कार्यलय)/- भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्रा के आवास पर आज एक महत्वपूर्ण विचार-गोष्ठी एवं सामाजिक सभा का आयोजन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में समाज के अनेक प्रबुद्धजनों, आचार्यों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों एवं युवाओं ने भाग लिया। सभा में वर्तमान सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों पर गंभीर मंथन करते हुए समाज की एकता, संगठन, राष्ट्रहित तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया।

सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्रा ने कहा कि किसी भी चुनाव का महत्व केवल हार-जीत तक सीमित नहीं होता, बल्कि उससे समाज की वैचारिक दिशा और जनमानस की चेतना का भी आकलन होता है। उन्होंने अभी बांकीपुर में हुए चुनाव में प्रशांत किशोर की जीत के संदर्भ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर कटाक्ष करते हुए कहा की ब्राह्मण विमुख असहाल तुम्हारा—- में कहा कि समाज को खासकर अब ब्राह्मणों को अपने बीच उत्पन्न विभिन्न प्रकार के चुनौतियों के समाधान के लिए समय की गति को देखते हुए हुए अपने चिंतन, संगठन और सामाजिक उत्तरदायित्व को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी के लिए अपने समाज के युवाओं को राजनीति में सक्रिय भूमिका को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि जनमत सदैव लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी शक्ति है।

पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्रीमती प्रियम पाठक जी ने कहा कि किसी भी समाज, राष्ट्र की वास्तविक शक्ति एक जुलता, उसकी सांस्कृतिक चेतना, नैतिक मूल्यों एवं जागरूक नागरिकों में निहित होती है। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि वह विभाजनकारी प्रवृत्तियों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और संगठन की भावना को सुदृढ़ करे।

भारतीय जन क्रांति दल के राष्ट्रीय महासचिव राकेश दत्त मिश्र जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ब्राह्मण समाज का दायित्व केवल अपने हितों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण समाज को ज्ञान, सेवा, सदाचार और संस्कार का मार्ग दिखाना उसकी परंपरा रही है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का आह्वान किया।

इसके उपरांत आचार्य सचिदानंद मिश्रा (नैकी) ने कहा कि ब्राह्मण समाज को समय के परिवर्तन को समझते हुए आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति ज्ञान, तप, त्याग, चरित्र और लोककल्याण की भावना में निहित है। यदि समाज अपनी वैदिक परंपराओं, ऋषि-संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों को जीवन में धारण करेगा, तो वह राष्ट्र के निर्माण में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेगा। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे शिक्षा, अनुशासन, संगठन और राष्ट्रसेवा को अपने जीवन का आधार बनाएं।

प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ (कैप्टन) डॉक्टर अशोक कुमार झा ने कहा कि समाज को परिस्थितियों का केवल दर्शक नहीं, बल्कि सकारात्मक परिवर्तन का मार्गदर्शक बनना चाहिए।

समाज सेवी हरि नारायण त्रिपाठी ने कहा विद्या, विनय और विवेक ही ऐसे आधार हैं, जिनसे समाज और राष्ट्र का भविष्य सुरक्षित एवं समृद्ध बन सकता है।

सभा के दौरान वक्ताओं ने हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है। कुछ वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि उपचुनाव के परिणामों को केवल राजनीतिक जीत-हार के रूप में नहीं, बल्कि मतदाताओं द्वारा लोकतांत्रिक चेतना और जनहित के पक्ष में दिए गए संदेश के रूप में भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनप्रतिनिधियों को समाज के प्रत्येक वर्ग के सम्मान, सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। इसी क्रम में कुछ वक्ताओं ने प्रशांत किशोर को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि उनके नेतृत्व में जनहित, सुशासन और प्रशासनिक उत्तरदायित्व को और अधिक बल मिलेगा।

सभा के अंत में संदीप मिश्र ने उपस्थित सभी सदस्यों ने जागरूक ब्राह्मण मतदाताओं के प्रति आभार व्यक्त किया तथा सामाजिक एकता, शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रनिर्माण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प दोहराया।

इस अवसर पर आचार्य अरुण मिश्र मधुप, पंडित बालमुकुंद मिश्रा, आचार्य सुनील पाठक, डॉ. जितेंद्र मिश्रा, अरुण ओझा, अखिलेश पांडेय, अमरनाथ मिश्रा, आचार्य सुनील पाठक, मनीष कुमार मिश्र रंजीत पाठक, पवन मिश्रा, किरण पाठक, महेश मिश्रा, बृजेश राय, विनयकांत मिश्रा, विश्वजीत चक्रवर्ती, रंजना पांडेय, सोनी मिश्रा, मृदुला मिश्रा, डॉ. ज्ञानेश, राजीव नयण पांडेय, प्रोफेसर सुनील कुमार मिश्र, अशोक दुबे, मुन्ना जी, दीपक पाठक, हरिद्वार मिश्रा, ज्ञानेश पांडे, रामनरेश पाठक, गणेश मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा, डॉ. गोपी, रणजीत मिश्रा कुंदन मिश्रा सहित महासभा से जुड़े बड़ी संख्या में गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। उपस्थित सदस्यों ने लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए समाज की एकता एवं राष्ट्रहित के लिए सतत कार्य करने का संकल्प लिया।

रिपोर्ट:- प्रियांशु मिश्रा

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Author: v9news

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