डॉक्टर साहब केवल अतीत का दस्तावेज नहीं वर्तमान की समझ और भविष्य की दिशा देने वाले मार्गदर्शी हैं: डॉ० विवेकानंद मिश्रा

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गया जी में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र की पुण्यतिथि के अवसर पर डॉक्टर विवेकानंद पथ स्थित डॉ. विवेकानंद मिश्र जी के आवास पर 7बीं पुण्यतिथि एक गरिमामयी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य, प्रबुद्ध एवं सम्मानित लोगों की उपस्थिति रही। सभा में उपस्थित लोगों ने डॉ. जगन्नाथ मिश्र के व्यक्तित्व, कृतित्व, सामाजिक योगदान तथा उनके विचारों को स्मरण करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने डॉ. जगन्नाथ मिश्र के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके जीवन से जुड़े विभिन्न पक्षों पर अपने विचार रखे।

सभा को संबोधित करते हुए भारतीय जन क्रांति दल के संस्थापक राष्ट्रीय महासचिव डॉ राकेश दत्त मिश्रा आदरणीय डॉ. जगन्नाथ मिश्र के व्यक्तित्व को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि उनका जीवन सामाजिक सरोकार, जनसेवा और अपने दायित्वों के प्रति समर्पण का परिचायक रहा। उन्होंने कहा कि किसी महान व्यक्तित्व की वास्तविक स्मृति केवल उनके पुण्यतिथि आयोजन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनके विचारों और आदर्शों को जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

समाजसेवी प्रसिद्ध व्यवसायी श्रीचरण बाबू डालमिया ने अपने विचार रखते हुए डॉ. जगन्नाथ मिश्र के जीवन में अनुशासन, सरलता और सामाजिक संवेदनशीलता को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समाज के निर्माण में ऐसे व्यक्तित्वों की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रहती है।

वरिष्ठ अधिवक्ता मो. याहिया ने डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा के कृतित्व, व्यक्तित्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि राजनीतिक क्षेत्र में डॉक्टर साहब ऐसे महान लोगों में एक थे जिन्होंने अपने आचरण और विचारों के माध्यम से लोगों को दिशा देने का आजीवन कार्य किया।उन्होंने लोगों से उनके जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया।

आचार्य सच्चिदानंद मिश्र नैकी ने डॉ. जगन्नाथ मिश्र को स्मरण करते हुए उनके व्यक्तित्व की सहजता, विद्वता और सामाजिक चेतना पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि महान व्यक्तित्व अपने कर्मों के माध्यम से समाज में ऐसी छाप छोड़ जाते हैं, जिसे समय कभी मिटा नहीं सकता। उनके विचार और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने रहते हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. जगन्नाथ मिश्र की स्मृति को जीवंत बनाए रखने के लिए समाज को उनके आदर्शों पर चलने का प्रयास करना चाहिए।

राधा मोहन मिश्र माधव ने भी सभा में अपने विचार रखते हुए डॉ. जगन्नाथ मिश्र के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनका जीवन समाज और लोगों के प्रति उत्तरदायित्व की भावना से जुड़ा रहा। उन्होंने डॉ. जगन्नाथ मिश्र के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने तथा सामाजिक एकता, सद्भाव और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

सभा में उपस्थित अन्य गणमान्य लोगों ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने डॉ. जगन्नाथ मिश्र के जीवन, विचारों और सामाजिक योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व समाज के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा। सभी ने उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करते हुए उनके बताए मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।

सभा का वातावरण पूर्णतः श्रद्धा, स्मरण और आत्मीयता से परिपूर्ण रहा। उपस्थित लोगों ने डॉ. जगन्नाथ मिश्र के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। पूरे कार्यक्रम के दौरान उनके जीवन और व्यक्तित्व से जुड़ी स्मृतियों का भावपूर्ण स्मरण किया गया।

सभा की अध्यक्षता करते हुए विभिन्न सामाजिक संगठनओं से जुड़े भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा एवं कौटिल्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्रा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि डॉक्टर साहब राजनीति के क्षेत्र में राजनेता के रूप में सर्वाधिक महत्वपूर्ण नेताओं में एक रहे हैं। वह अपनी लंबी राजनीतिक जीवन यात्रा में कई उतार चढ़ाव देखा है, किंतु कभी भी उन्होंने अपने उद्देश्यों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। बिहार विकास के पीड़ा उनकी रगों में निरंतर प्रवाहित होती रहती थी। विभिन्न प्रकार के संघर्ष चुनौतियों के बीच बहुया आमी व्यक्तित्व कृतित्व से भूमिका का निष्ठा पूर्वक निर्वहन करते रहे। आज मैं उनका स्मरण करते हुए भावुक हो रहा हूं। क्योंकि उन्होंने अपने निधन के कुछ महीने पूर्व अपने एक पत्र में पत्र में लिखा था कि “सच कहूं तो मैं डॉक्टर विवेकानंद बाबू को एक प्राण दो शरीर मानता हूं”। और हम दोनों एक की तरह रहे भी। यह मेरे लिए अत्यंत ही सौभाग्य एवं गर्व की डा मिश्र द्वारा लिखित पत्र को उपस्थित सभी लोगों को दिखाया। डॉक्टर मिश्रा ने आगे कहा आज पुण्यतिथि पर हम सबो के लिए कृतज्ञता ज्ञापित करने और आत्म मंथन का अवसर लेकर आया है। राजनीतिक की ऐसी व्यवस्था ऐसी गिरावट हम लोगों ने कभी नहीं देखी होगी। जो आज देखने को मिल रहा है, काश आज डॉक्टर जगन्नाथ मिश्र जी होते ।

अंत में डिंपल कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि मिश्र जी की स्मृति को नमन करने के साथ-साथ उनके विचारों और आदर्शों को समाज में आगे बढ़ाने का सार्थक प्रयास भी हम समूह के द्वारा होनी चाहिए। उपस्थित लोगों ने उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उनके प्रति अपनी गहरी श्रद्धा एवं सम्मान व्यक्त किया।
डॉ ज्ञानेश भारद्वाज, मनीष कुमार, डॉ रविंद्र कुमार, चंद्र किशोर सिंह, पन्नू लाल यादव, मोहम्मद हसनैन, अनवरी खातून, शंभू लाल गुर्दा, रीता उपाध्याय, रूबी देवी, अच्युत अनंत मराठे, एस एन उपाध्याय, चंद्र मौली प्रसाद,विश्वजीत चक्रवर्ती, निरंजन कुमार, मो. इमरान अली, संतोष कुमार सिंह,विकास कुमार, कुंदन कुमार, पवन मिश्रा, शंभू गिरी बटुक बाबा, शंभू नाथ दिलीप कुमार, नीरज वर्मा, मोहम्मद आलम,अमरनाथ पांडेय, श्रवण कुमार, कुमार विभाग कुमार, विकास कुमार, पार्वती देवी, कुमार प्रदीप सेतिया, कमल कुमार नुसरत प्रवीन, फूल कुमारी, चंद्रभूषण मिश्र,राम केवल सिंह, कुंदन मिश्रा,गौरव सिंह,पुष्पा देवी, सुनीता देवी, मनीष मिश्रा, दीपक पाठक अधिवक्ता , रंजना पांडे, सुनील कुमार मिश्रा,राखी कुमारी, प्यारी देवी ,शीतल चौबे सीता देवी सुरेश पासवान ,रवि कुमार दास के अलावा कई लोग मौजूद थे।

रिपोर्ट:- प्रियांशु मिश्रा

 

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Author: v9news

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