सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन का जीवन ही शिक्षकों का आदर्श संदेश है:डॉ० विवेकानंद मिश्र

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गया जी/ स्थानीय डॉक्टर विवेकानंद पथ पर भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा एवं कौटिल्य मंच के संयुक्त तत्वावधान में शिक्षक दिवस के पावन एवं गरिमामय अवसर पर ज्ञान, शिक्षा तथा गुरु-परम्परा के प्रति श्रद्धा अर्पित करने हेतु एक भव्य विद्वत्सभा का अभासीय आयोजन डॉ. विवेकानन्द मिश्र जी के आवास पर किया गया।

सभा का शुभारंभ महासभा के संरक्षक आचार्य वल्लभ जी महाराज ने कहा शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान प्रदान करने वाला व्यक्ति नहीं, अपितु वह समाज और राष्ट्र के चरित्र का निर्माता होता है। उसके संस्कारों एवं मार्गदर्शन से ही भावी पीढ़ी अपने जीवन का उचित पथ निर्धारित करती है।

सभा की अध्यक्षता डॉ. विवेकानन्द मिश्र ने किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च रहा है। सामाजिक परिवेश में पाश्चात्य सभ्यता संस्कृति के साथ शिक्षा का जिस प्रकार से व्यावसायिक करण हुआ है, घोर नैतिक पतन हुआ, वह राष्ट्र के लिए अत्यंत ही चिंता जनक है। गुरु-परम्परा के मूल आदर्शों को पुनः प्रतिष्ठित करना समय की महती आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को कर्मयोगी, सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। शिक्षकों के लिए उनका जीवन ही आदर्श संदेश है। धवल चरित्र, सादगी, ईमानदारी, कर्तव्य निष्ठा, स्वाभिमान और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण का ऐसा भाव जिनका राजनीतिक जीवन की इतिहास में एक अद्वितीय मिसाल है, उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।

आचार्य सच्चिदानन्द मिश्र जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान-परम्परा का मूलाधार सदैव गुरु के प्रति श्रद्धा और शिष्य के प्रति गुरु के वात्सल्य में निहित रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जीविकोपार्जन का साधन प्राप्त करना नहीं, बल्कि मनुष्य को संस्कारित, विवेकशील एवं उत्तरदायी नागरिक बनाना है।

दिव्य रश्मि के संपादक एवं भारतीय जन क्रांति दल के राष्ट्रीय महासचिव ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में तीव्र परिवर्तन हो रहे हैं। ऐसे समय में शिक्षक का उत्तरदायित्व और भी अधिक बढ़ जाता है। शिक्षक को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी विद्यार्थियों तक पहुँचाना चाहिए।
श्री चरण बाबू डालमिया ने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक मानी जाएगी, जब वह व्यक्ति के ज्ञान के साथ उसके चरित्र का भी निर्माण करे और उसे राष्ट्र तथा समाज के प्रति अपने दायित्वों का बोध कराए।

सभा में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी शिक्षक दिवस के महत्त्व पर अपने विचार प्रकट किए तथा समाज में शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना को सुदृढ़ करने का संकल्प व्यक्त किया। समस्त वक्ताओं के विचारों में एक समान भाव यह रहा कि गुरु भारतीय सभ्यता की उस अखण्ड परम्परा के संवाहक हैं, जिसके द्वारा ज्ञान, संस्कार और संस्कृति एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक प्रवाहित होती रही है।

अन्ततः सभा का समापन के लिए उपस्थित लोगों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए प्रोफेसर सुनील कुमार मिश्राने सभी उपस्थित लोगों को खासकर शिक्षक समुदाय के प्रति कृतज्ञता एवं सम्मान की भावना व्यक्त किया।
सभा में प्रमुख व्यक्तियों में वरिष्ठ अधिवक्ता याहिया पंडित बालमुकुंद मिश्रा स्वामी सुमन गिरि आचार्य अरुण मिश्रा मधुप छोटू आचार्य सुनील पाठक अमरनाथ पुष्पा पार्वती नीलम कुमारी डॉ जितेंद्र कुमार मिश्रा अरुण ओझा मनीष कुमार किरण पाठक राखी कुमारी शीतल चौबे डिंपल कुमारी डॉक्टर ज्ञानेश भारद्वाज डॉक्टर दिनेश कुमार सिंह डॉक्टर रविंद्र कुमार प्रोफेसर अशोक कुमार मांडवी गुर्दा रूबी कुमारी नीरू कुमारी शंभू लाल गुर्दा कुमार दीपक पाठक उत्तम पाठक शिवजी नीरज मिश्रा रवि कुमार चंद्रमौली कुमार मिश्रा रंजन कुमार सिंह राजेश त्रिपाठी अमित त्रिपाठी कविता राऊत कुंदन मिश्रा सुनील कुमार शारदा मिश्रा अमृता मृदुला मिश्रा मानवाधिकार के जितेंद्र ठाकुर गुप्तेश्वर ठाकुर फूल कुमारी प्यारी देवी गौरव कुमार सिंह मिश्रा रंजीत कुमार पाठक पवन मिश्रा महेश मिश्रा के अलावा कई लोग मौजूद थे।

रिपोर्ट:- प्रियांशु मिश्रा

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