हिंदी दिवस ‘आत्ममंथन’ दिवस के रूप में मनाई गई

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गया जी/- स्थानीय डॉक्टर विवेकानंद पथ में हिंदी दिवस को आत्ममंथन दिवस के रूप में समारोह पूर्वक मनाई गई। इस मौके पर विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े कौटिल्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर विवेकानंद मिश्र ने अपने संबोधन में कहा की राष्ट्रभक्तों के साथ आम जनमानस को एकता की सूत्र में पिरोनेवाला क्रांतिकारियों को प्रचंड ऊर्जा स्वर देने बाली इस गौरवमयी भाषा की ऐसी उपेक्षा मेरे समझ से एक घोर राष्ट्रीय अपराध है। डॉ मिश्र ने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं भारतीय संस्कृति और चेतना की वाहक है। उन्होंने जोर देकर कहा हिंदी केवल अतीत का गौरव नहीं वर्तमान और भविष्य की दिशा है।

आचार्य सच्चिदानंद मिश्र ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा की हजार वर्षों की गुलामी और आजादी के 77 वर्षों से भी अधिक समय से विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का मुकाबला साहस और धैर्य के साथ मानवीय संवेदना नैतिक मूल्यों के साथ राष्ट्र को संप्रेषित किया है। आजादी के बाद हमारे रहनुमाओं को को हिंदी को उचित अवसर देकर और उसका समुचित संवरण कर कर इसकी सरलता, सुलभता, व्यापकता और श्रेष्ठ दर्शन को वैश्विक स्वीकार्यता दिलाना चाहिए था, किंतु आश्चर्य एवं चिंता का विषय है कि आज तक तमाम शिक्षा संस्थानों प्राथमिक से लेकर विश्वविद्यालयी शिक्षा संस्थाओं तक का अंग्रेजीदा नौकरशाहों का भरमार है। जिसका नकारात्मक प्रभाव शिक्षार्थियों की संकल्पना शक्ति और व्यावहारिक वैचारिक प्रतिभा पर पड़ता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता याहिया ने कहां की इसलिए आज हम सबो को हिंदी दिवस का उत्सव या मात्र औपचारिकता पूरी करने की झूठी दिखावे की कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।

पूनम कुमारी अधिवक्ता ने कहा ईमानदारी पूर्वक आत्ममंथन कर हिंदी जिसकी अधिकारी है उसे उचित स्थान, न्याय दिलाने क लिए प्रयास करनी चाहिए।

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रिपोर्ट:- प्रियांशु मिश्रा

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